1.30 लाख कर्मचारियों के बीच रिलायंस रिटेल ने मारी बाजी, बनी देश की टॉप-13 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' कंपनी
हिल्टन और सिस्को जैसी ग्लोबल कंपनियों के बीच रिलायंस रिटेल ने बनाई खास जगह, जानिए किस आधार पर मिली यह बड़ी रैंकिंग
अनन्य सोच। मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल को काम करने के लिए भारत की सबसे बेहतरीन कंपनियों में शुमार किया गया है। 'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीट्यूट' (Great Place To Work Institute) की "इंडियाज बेस्ट कंपनी टू वर्क फॉर 2026" (India's Best Company To Work For 2026) लिस्ट में कंपनी को टॉप-100 में 13वां स्थान मिला है। इस प्रतिष्ठित सूची में पहले तीन स्थानों पर हिल्टन (Hilton), सिस्को सिस्टम्स इंडिया (Cisco Systems India) और सिंक्रोनी इंटरनेशनल सर्विसेज (Synchrony International Services) जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
यह रैंकिंग 'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीट्यूट' द्वारा आयोजित एक खास कार्यक्रम में घोषित की गई। गौर करने वाली बात यह है कि रिलायंस रिटेल देश के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क का संचालन करता है और सूची के मुताबिक कंपनी में भारत में कर्मचारियों की संख्या 1,30,457 है। इतने विशाल कर्मचारी आधार के साथ टॉप-100 कंपनियों में जगह बनाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो कंपनी की मजबूत वर्क कल्चर को दर्शाती है। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (Reliance Industries Limited) और रिलायंस रिटेल को संयुक्त रूप से "इंडियाज बेस्ट एम्प्लॉयर्स अमंग नेशन-बिल्डर्स" (India's Best Employers Among Nation-Builders) में भी मान्यता दी गई है। यह सम्मान उन्हीं कंपनियों को मिलता है जिनका प्रभाव सिर्फ बिजनेस तक सीमित न रहकर रोजगार सृजन, जरूरी सेवाओं और राष्ट्रीय विकास से भी जुड़ा होता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस रैंकिंग को तय करने में किसी जूरी या व्यक्ति विशेष की राय का कोई रोल नहीं होता। ग्रेट प्लेस टू वर्क की रैंकिंग पूरी तरह कर्मचारी अनुभव और कंपनी की कार्य-संस्कृति के आकलन पर टिकी होती है, जिसमें ट्रस्ट इंडेक्स सर्वे (Trust Index Survey) को 75 प्रतिशत और कल्चरल ऑडिट (Cultural Audit) को 25 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है यानी पूरा फैसला कर्मचारियों की राय पर ही निर्भर करता है।
रिटेल सेक्टर में जब ऑनलाइन-ऑफलाइन कारोबार, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में मिली यह रैंकिंग रिलायंस रिटेल की कर्मचारी-केंद्रित सोच को साफ तौर पर रेखांकित करती है।