अब बड़े प्लॉट भी बनेंगे छोटे—रीको के नए नियमों से उद्योगों को मिलेगा बड़ा बूस्ट

निवेशकों और उद्यमियों के लिए खुलेंगे नए अवसर

अब बड़े प्लॉट भी बनेंगे छोटे—रीको के नए नियमों से उद्योगों को मिलेगा बड़ा बूस्ट

 अनन्य सोच। औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए रीको ने बड़ा निर्णय लेते हुए बड़े औद्योगिक भूखण्डों के उप-विभाजन (Sub-Division) को सशर्त मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले प्लॉट भी छोटे हिस्सों में बांटकर बेचे जा सकेंगे, जिससे निवेशकों को उद्योग स्थापित करने के अधिक अवसर मिलेंगे।

 नए नियमों की खास बातें

रीको ने RIICO Disposal of Land Rules, 1979 के नियम 17(ई) को फिर से लागू करते हुए यह व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत उप-विभाजन के बाद प्रत्येक भूखण्ड का न्यूनतम आकार 500 वर्गमीटर तय किया गया है।
हालांकि, यह सुविधा हर किसी को तुरंत नहीं मिलेगी—भूखण्ड का उप-विभाजन आवंटन के कम से कम 7 साल बाद ही संभव होगा और भूमि पूरी तरह विवाद रहित होनी चाहिए।

 प्रक्रिया और जरूरी शर्तें

उप-विभाजन के लिए आवंटी को प्रस्तावित लेआउट प्लान रीको में जमा कराना होगा, जिसे लैंड प्लान कमेटी से मंजूरी लेनी होगी। यदि प्लॉट पर बैंक या किसी वित्तीय संस्था का ऋण है, तो संबंधित एनओसी अनिवार्य होगी।

इसके साथ ही, उप-विभाजित क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं—जैसे सड़क, ड्रेनेज, बिजली, स्ट्रीट लाइट, जल आपूर्ति और वर्षा जल संचयन—मूल आवंटी को अपने खर्च पर उपलब्ध करानी होंगी। यह सभी कार्य तीन वर्षों के भीतर पूरे करना अनिवार्य रहेगा।

 इंफ्रास्ट्रक्चर के स्पष्ट मानक

रीको ने आंतरिक सड़कों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
1500 वर्गमीटर तक के प्लॉट के लिए न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी सड़क और उससे बड़े प्लॉट के लिए 24 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य होगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाएं सुनिश्चित होंगी।

 शुल्क और वित्तीय प्रावधान

उप-विभाजन के लिए शुल्क संबंधित औद्योगिक क्षेत्र की प्रचलित दर का 2% निर्धारित किया गया है। इसके अलावा ट्रांसफर चार्ज और गतिविधि परिवर्तन के लिए भी नियमानुसार शुल्क देना होगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि उप-विभाजित प्लॉट की लीज अवधि मूल लीज से अधिक नहीं होगी और नए खरीदार को दो वर्षों के भीतर उस प्लॉट का उपयोग शुरू करना होगा।

निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

लंबे समय से उद्यमी बड़े प्लॉट्स के उप-विभाजन की मांग कर रहे थे। ऐसे में यह निर्णय न केवल भूमि के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। इससे नए निवेश आएंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।