'आपदा को बनाएं अवसर': शिवराज सिंह चौहान का बड़ा प्लान, बिहार की लीची से लेकर पूर्वोत्तर के मसालों तक होगा एक्सपोर्ट बूस्ट
कृषि भवन में हुए अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने 'होल ऑफ गवर्नमेंट' अप्रोच पर दिया जोर, शॉर्ट-टर्म से लॉन्ग-टर्म तक बनेगी ठोस Action Plan
अनन्य सोच। देश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित "भारत की कृषि का रूपांतरण - अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन" में मुख्य रूप से भाग लिया। इस हाई-लेवल सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और वर्चुअली जुड़े अधिकारी भी शामिल हुए। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह भी इस बैठक से वर्चुअली जुड़े।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि कृषि सुधारों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खास फोकस रहा है, लेकिन असली चुनौती योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन महज एक औपचारिकता नहीं बनेगा, बल्कि सभी सुझावों को ठोस Action Plan में बदला जाएगा। इसके लिए केंद्र, राज्य सरकारें, कृषि विश्वविद्यालय, स्टार्टअप्स और किसान संगठनों के बीच मजबूत Partnership बनाने पर जोर दिया गया।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मंत्री ने बिहार की मशहूर लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और पूर्वोत्तर भारत में मिलने वाले अदरक, हल्दी और विशिष्ट मिर्च जैसी फसलों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने की योजना का खुलासा किया। इसके लिए पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के साथ जल्द ही एक खास बैठक होगी।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बढ़ते हुए चौहान ने 'एग्रीस्टैक' और 'फार्मर आईडी' को लैंड पार्सल से लिंक करने पर जोर दिया, लेकिन साथ ही टेक्नोलॉजी में Human Touch बनाए रखने की भी सलाह दी।
सबसे अहम घोषणा यह रही कि सभी सुझावों को Short-Term, Medium-Term और Long-Term Plans में बांटा जाएगा, जिसकी मॉनिटरिंग के लिए विशेष टीम हर महीने रिपोर्ट देगी। जल संकट और 'अल नीनो' जैसी चुनौतियों के बावजूद मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है।